जन्मदिन मुबारक- 1 जुलाई वीर अब्दुल हमीद जो पाकिस्तान के टैं​क तबाह कर हुए थे शहीद 

दुनिया का हर युद्ध हार-जीत के साथ ही अपने पीछे उन सैनिकों की कहानियां भी छोड़ जाता है जिसे सुनने के लिए वे हमारे बीच मौजूद नहीं रहते।


वीर अब्दुल हमीद भारत के ऐसे ही शूरवीरों में से एक थे जिनके बलिदान की कहानी आज हमें प्रेरणा देती है।

अब्दुल हमीद का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में स्थित धामूपुर गांव में 1 जुलाई 1933 को हुआ था। उनका परिवार दर्जी के पेशे से जुड़ा था। वहीं अब्दुल हमीद के पिता सेना में थे। 

कहा जाता है कि उस दौरान उन्होंने 4 टैंक उड़ा दिए थे। हालांकि जब वो एक और टैंक को अपना निशाना बना रहे थे, तभी एक पाकिस्तानी टैंक की नजर में आ गए।


दोनों ने एक-दूसरे पर एक साथ फायर किया।  वो टैंक भी नष्ट हुआ और अब्दुल हमीद की जीप के भी परखच्चे उड़ गए।  

हमीद को 1965 की भारत-पाकिस्तान लड़ाई में खेमकरन सेक्टर में टैंक नष्ट करने के लिए परमवीर चक्र मिला था।


गौरतलब है कि ये टैंक पाकिस्तानी सेना के लिए काफी अहम थे और अमेरिका से खरीदे किए गए थे।  

कहा जाता है कि जब 1965 के युद्ध शुरू होने के आसार बन रहे थे तो वो अपने घर गए थे, लेकिन उन्हें छुट्टी के बीच से वापस ड्यूटी पर आने का आदेश मिला। 
 
उस दौरान उनकी पत्नी ने उन्हें खूब रोका, लेकिन वे रुके नहीं और रोकने की कोशिश के बाद हमीद ने मुस्कराते हुए कहा था- देश के लिए उन्हें जाना ही होगा।  

अब्दुल हमीद पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहुत ही साधारण परिवार से आते थे लेकिन इसके बावजूद जब उन्हें मौक़ा मिला उन्होंने वीरता और साहस की असाधारण मिसाल क़ायम की।  

आज 1 जुलाई को हवलदार अब्दुल हमीद का जन्मदिन है। हमीद भारतीय सेना के वो वीर हैं, जो वीरता और साहस का परिचय देते हुए 1965 के भारत-पाक युद्ध में कई पाकिस्तानी पेटन टैंकों को ध्वस्त कर दिया था।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 1965, सुबह 9 बजे वे चीमा गांव के बाहरी इलाके में गन्ने के खेतों के बीच बैठे थे। उस दौरान उन्हें दूर आते टैंकों की आवाज सुनाई दी। 

थोड़ी देर में उन्हें वो टैंक दिखाई भी देने लगे और उन्होंने टैंकों के अपनी रिकॉयलेस गन की रेंज में आने का इंतजार किया, गन्ने की फसल का कवर लिया और जैसे ही टैंक उनकी आरसीएल की रेंज में आए, फायर कर दिया।