Mail Online को दिए गए एक साक्षात्कार में आमिर ने बताया, “ उस दिन मैं अपने भाई के लिए, जो मेरे पिताजी के साथ उनकी आरी के करखाने में काम करता था, खाना ले जा रहा था।


आरी मशीन के साथ मैं अक्सर ही खेला करता था, पर उस दिन मेरे दोनों हाथ उसमे फंस गए।”

अपने गर्दन और कंधे के बीच बल्ले को अटका कर बैटिंग करना और पैरों की उंगलियों से बोलिंग करना उसने इसी कठिन प्रयास से सीखा।

३ साल के इलाज के बाद जब वह वापस विद्यालय गया, तब उसके शिक्षको ने भी उसे वापस घर का रास्ता दिखा दिया।


इसी मुकाम पर आमिर ने यह संकल्प लिया कि अब यह सफ़र उसे अपने बलबूते पर तय करना है।


अखरोट बेच कर वह किताबें खरीदता और खाली समय में क्रिकेट का अभ्यास करता। 

आमिर एक दिन सचिन तेंदुलकर की तरह खेलना चाहते हैं। आइये आमिर के इस प्रेरणात्मक सफ़र को देखें

सलाम-दोनों हाथ खोने के बाद भी, जम्मू-कश्मीर पैरा क्रिकेट टीम के लिए खेलते है आमिर

आमिर ने अपनी कमजोरी को कभी भी अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया। क्रिकेट के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था, और इसे वापस खेलने के लिए आमिर को कड़ी मेहनत करनी पड़ी।

आज, 26 वर्ष की आयु में, वह जम्मू कश्मीर की राज्य पैरा क्रिकेट टीम के  कप्तान है।

आमिर हुसैन लोन उस वक्त महज़ आठ साल के थे जब एक दुर्घटना में उन्हें अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े।  

आमिर के पिता को उसकी चिकित्सा के खर्चे के कारण अपना कारखाना भी बेचना पड गया।


इस आर्थिक तंगी के अलावा, सामाजिक तौर पर भी आमिर को ऐसे देखा जाने लगा जैसे वह अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने के योग्य नहीं रहा।