जमीयत उलेमा-ए-हिन्द और कांग्रेस का सबंध देश की आजादी के बाद से ही बड़ा मजबूत रहा है और गांधी परिवार के लोग जमीयत के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं,


ऐसे में अरशद मदनी और अखिलेश की इस मुलाकात को राजनैतिक तौर पर कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

मौलाना अरशद मदनी और अखिलेश यादव की ये मुलाकात लगभग एक घंटे तक लखनऊ में हुई है। इस बात की जानकारी जमीयत उलेमा ए हिन्द के दिल्ली स्थित कार्यलय ने दी है। बताया जा रहा है इस मुलाकात में यूपी के सियासी और समाजी हालात पर चर्चा हुई है। 


जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। जिसको लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है। माना जा रहा है कि उन्होने अपने चाचा मौलाना अरशद मदनी से मनमुटाव के चलते इस्तीफा दिया है।

उत्तर प्रदेश के मतदाताओं में मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा है। यूपी की कई लोकसभा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में दिखाई देते हैं,


ऐसे में अगर मौलाना अरशद मदनी सपा-बसपा गठबंधन के साथ खड़े नज़र आते हैं, तो यकीनन इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगेगा,


क्योंकि कांग्रेस को सपा-बसपा-आरएलडी गठबंधन में स्थान नहीं मिला है और अगर मुस्लिम उसके साथ नहीं आते हैं, तो यूपी में कांग्रेस की दिक्कतें और ज्यादा बढ़ जाएंगी।

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने 17 जनवरी को लखनऊ में समाजवादी पारती के अध्य्क्ष अखिलेश यादव से मुलाक़ात की।


उनकी ये मुलाक़ात आगामी लोकसभा चुनाव से जुड़ी बताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश सियासी हलचल-अरशद मदनी की अखिलेश यादव से मुलाक़ात