सूरह बकरा ,सूरह न. 2,आयतल न. 255 जिसे हम लोग आयतल कुर्सी कहते हैं ।


आयत कुर्सी की बड़ी फजीलतें है जिसकी कोई इंतेहा नहीं। आयतल कुर्सी कुरान मजीद की तमाम आयतो में सबसे आला और अफ़जल हैं।

आप ने फिर पूछा कि किताबउल्लाह में सबसे अफजल आयत कौन सी है तब मैंने कहा कि अल्लाह हू ला इलाहा इल्ला हूवल ,तब आप रसु्लल्लाह ने मेरे सीने पर हाथ फेरा और कहा कि तुझे इल्म मुबारक हो। दोस्तों यह आयत बहुत ही अहम है।


इसको आप बहुत कसरत से पढ़ने की कोशिश किया करें। 

इसी तरह अबू दाऊद की रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम मस्जिद ए नबवी से मुत्तासिर मुहाजरिन की एक रिहाईशगाह (मतलब एक जगह) थी उसमे सुबह आप तशरीफ लाए तो एक आदमी ने आप से पूछा कि या रसूल अल्लाह कुरान ए मजीद में सबसे अजमत वाली आयत कौन सी है आपने फरमाया की आयतल कुर्सी सबसे अज़मत वाली आयत है। 

दुनिया की सारी दवाए,सारा मेडिकल, सारे रिपोर्ट और साईँस जहाँ काम करना बँद करते है ..वहीँ से तो आयतुल कुर्सी अपना काम शुरु
करती है। 

आयतल कुर्सी पढ़ने की क्या है फ़ज़ीलत और उसकी अहमियत? जानिए 

सही मुस्लिम की रिवायत है आबि बिन काब ने कहा है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि क्या तुझे मालूम है कि किताबुल्लाह में से कौन सी आयत सबसे अफ़ज़ल है?


तो मैंने अर्ज किया कि अल्लाह और उसके रसूल ही जानते होंगे कि सबसे अफजल आयत कौन है मैं नहीं जानता।