बशीर बद्र – सँवार नोक पलक अबरूओं में ख़म कर दे

आसमानों को हमने बताया नहीं,
डूबती शाम में डूबता कौन है।  

ख़ुशबूओं में नहाई हुई शाख़ पर,
फूल-सा मुस्कुराता हुआ कौन है।  

दिल को पत्थर हुये इक ज़माना हुआ,
इस मकाँ में मगर बोलता कौन है।  

तुम भी मजबूर हो हम भी मजबूर है,
बेवफा कौन है बावफा कौन है।  

बशीर बद्र – उर्दू शायरी- आपकी पसंदीदा शायरी एक जगह

बशीर बद्र – ख़्वाब इस आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये

बशीर बद्र – किसने मुझको सदा दी बता कौन है

सँवार नोक पलक अबरूओं में ख़म कर दे,
गिरे पड़े हुए लफ़ज़ों को मोहतरम कर दे।  

ग़ुरूर उस पे बहुत सजता है मगर कह दो,
इसी में उसका भला है ग़ुरूर कम कर दे।  

किसने मुझको सदा दी बता कौन है,
ऐ हवा तेरे घर में छुपा कौन है।  

बारिशों में किसी पेड़ को देखना,
शाल ओढ़े हुए भीगता कौन है।  


मैं यहाँ धूप में तप रहा हूँ मगर,
वो पसीने में डूबा हुआ कौन है।  

ये भी पानी है मगर आँखों का ऐसा पानी,
जो हथेली पे रची मेहंदी उड़ा कर ले जाये।  

मैं मोहब्बत से महकता हुआ ख़त हूँ मुझ को,
ज़िन्दगी अपनी किताबों में दबा कर ले जाये।  

ख़ाक इंसाफ़ है नाबीना बुतों के आगे,
रात थाली में चिराग़ों को सजा कर ले जाये।  

यहाँ लिबास, की क़मीत है आदमी की नहीं,
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे।  

चमकने वाली है तहरीर मेरी क़िस्मत की,
कोई चिराग़ की लौ को ज़रा सा कम कर दे।  

किसी ने चूम के आँखों को ये दुआ दी थी,
ज़मीन तेरी ख़ुदा मोतियों से नम कर दे।  

ख़्वाब इस आँखों से अब कोई चुरा कर ले जाये,
क़ब्र के सूखे हुये फूल उठा कर ले जाये।  

मुंतज़िर फूल में ख़ुश्बू की तरह हूँ कब से,
कोई झोंकें की तरह आये उड़ा कर ले जाये।