सरकार ने देश के सभी 640 जिलों में इस योजना को लागू करने का निर्णय लिया है। 

जिस पर काम करते हुए सरकार ने 2015 में योजना के पहले चरण में कम लिंगानुपात वाले 100 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया है।

उसके बाद के दूसरे चरण में सरकार ने 61 और जिलों को जोड़ा। 

राज्य मंत्री का यह भी कहना है कि इन 161 जिलों में शुरू की गई ये योजना पूरी तरीके से सफल रही है। साथ ही केंद्रशासित प्रदेशों में गिरावट खास तौर पर तेज रही है।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान साबित हुआ जुमला -56 प्रतिशत फंड हुआ पब्लिसिटी पर खर्च

56 प्रतिशत फंड हुआ पब्लिसिटी पर खर्च 

मोदी सरकार के पांच साल के कार्याकल में यानी 2014-15 से 2018-19 तक इस योजना के तहत आवंटित 56 प्रतिशत से अधिक फंड मीडिया संबंधी गतिविधियों पर खर्च किया गया। 

जबकि 25 प्रतिशत से भी कम की धनराशि जिलों और राज्यों को दी गई। हैरानी की बात तो ये है कि सरकार ने 19 प्रतिशत से ज्यादा की धनराशि जारी ही नहीं की है।

इन आंकड़ों को केंद्रीय महिला और बाल विकास राज्य मंत्री डॉ विरेंद्र कुमार ने जारी किया है। इतना ही नहीं इतना ही नहीं अब तक सरकार इस स्कीम पर 644 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है।

इनमें से केवल 159 करोड़ रुपये ही जिलों और राज्यों को भेजे गए हैं।

पीएम मोदी ने 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा लगाते हुए इस योजना की शुरूआत की थी। 

पीएम मोदी की इस योजना को शुरू करने का मकसद बेटियों के साथ हो रहे भेदभाव को रोकना और लड़कियों को आगे बढ़ने के मौके देने का था। 

लेकिन हाल ही में जो आकंड़े सामने आए हैं उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि मोदी सरकार का इस योजना को शुरू करने मुख्य उद्देश्य सिर्फ पब्लिसिटी करना था।