बता दें कि अगस्त 2017 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 70 बच्चों की मौत हो गई। डॉक्टर कफील ने बताया कि मैंने आरटीआई भी दाखिल की। आरटीआई में सरकार ने माना कि वे सबसे जूनियर डॉक्टर थे, न ही इंसेफेलाइटिस वार्ड के वे प्रमुख थे, न ही वाइस प्रिंसिपल थे।

डॉक्टर कफ़ील ने लखनऊ मैं पत्रकार सम्मेलन में सुनाई अपने ऊपर हुए ज़ुल्म की दास्तान

डॉक्टर कफील खान ने बताया कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई बच्चों की मौत के लिए मुझे बलि का बकरा बनाया गया।

07-03-19 को माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह डॉ0 कफील खान के निलम्बन के खिलाफ 3 महीने के भीतर विभागीय जाँच पूरी करे। 

माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मेरे खिलाफ चिकित्सा लापरवाही मे और ऑक्सीजन टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का कोई सबूत नही पाया गया

डॉ0 कफील खान ने मज़ीद खा की 'मैं रिव्यू पिटीशन के साथ पुनः उच्च न्यायालय की शरण मे जा रहा हूं या अपने निलम्बन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा'। 

हाल ही में योगी सरकार ने दावा किया था कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी। ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौतें नहीं हुई। इसके विपरीत सरकार ने हाई कोर्ट के हलफनामे में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी को स्वीकार किया है।  

डॉक्टर कफ़ील ने लखनऊ मैं पत्रकार सम्मेलन में सुनाई अपने ऊपर हुए ज़ुल्म की दास्तान।  

डॉक्टर कफील ने एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद एक प्रेस वार्ता की। इसमें उन्होंने सरकार के खिलाफ इस हादसे से जुड़े गम्भीर आरोप लगाए हैं।

हाल ही में आरटीआई में सरकार ने स्वीकार किया है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11,12 वें अगस्त 2017 को 54 घंटे तक तरल ऑक्सीजन की कमी थी, और डॉ0 कफील खान ने बच्चों को बचाने के लिए वास्तव में जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की थी।