करोड़ो मुसलमान उनको अपना हीरो समझते हैं। जब भी दुनियाभर में मुसलमानों पर मुसीबत आयी है अर्दोगान उनके लिए हमेशा हर तरह से मदद करने के लिए हरदम तिययर रहते हैं।


चाहे फिर वो रोहिंग्या मुसलमान हों या फिर बंगलादेशी मुसलमान।  

मेयर बनते ही तय्यब एर्दोगान ने इसतम्बूल में शराब की दुकानेँ बन्द कराई और शराब पर प्रतिबंद लगा दिया जिसके बाद धर्मनिर्पेक्षता वादियों  ने उनका विरोध जताया लेकिन कुछ बिगाड़ नही पाये।

तय्यब एर्दोगान जन्म तुर्की की राजधानी इसतम्बूल के करीबी शहर क़ासिम पाशा में 1954 में हुआ जहां उनका परिवार रिज़ा राज्य से आकर रहने लगा था,तय्यब एर्दोगान के पिता का नाम अहमद एर्दोगान और माता का नाम तन्ज़िला एर्दोगान था। 

विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान तय्यब एर्दोगान की मुलाक़ात नजमुद्दीन अर्बकान से हुई जो तुर्की देश के पहले इस्लामवादी प्रधान मंत्री बने, और तुर्की के इस्लामवादी आंदोलन में प्रवेश किया और यहीं से एर्दोगान ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।  

सोशल मीडिया पर आज तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एर्दोगान को कौन नहीं जानता।


रजब तैय्यब अर्दोगान दुनिया के पहले एकमात्र ऐसे मुस्लिम राष्ट्रपति हैं जिनको अंतररास्ट्रीय स्तर पर ख्याती प्राप्त है। 

तय्यन एर्दोगान के राष्ट्रपति बनते ही फ़ौज के एक धड़े ने तुर्की में मार्शल लगाने का ऐलान कर दिया तो उस समय तय्यब एर्दोगान से तुर्की के नागरिकों की मोहब्बत की परीक्षा हुई जनता ने अपने घरों से निकलकर बागी फौजियों के टैंकों के सामने लेट गए और फौजियों को पकड़ कर उन्हें सड़कों पर लिटाकर सज़ा देने लगे जिससे बगावत नाकाम हुई।

1980 की सैन्य तख्तापलट के बाद तुर्की में इस्लाम विरोधी सरकार ने जन्म लिया उस समय तय्यब इसतम्बूल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी में काम करते थे जहाँ उनका बॉस एक सेवानिवृत्त कर्नल था जिसने तय्यब से मूंछें दाढ़ी कटवाने के लिए कहा जिस पर तय्यब एर्दोगान ने नौकरी छोड़ दी।

तय्यब के पिता तुर्की नेवी में कॉस्ट गार्ड के कैप्टन थे इसी कारण इसी कारण तय्यब एर्दोगान का बचपन साहिल समन्दर पर आबाद शहर रीझे में गुज़रा,तय्यब एर्दोगान के एक भाई मुस्तफ़ा और एक बहन वसीला है।

बीबीसी न्यूज़ के वर्ल्ड एडिशन में 4 नवम्बर 2002 को लिखा था कि तय्यब ने अपनी नोजवानी के दिनों में नीबूं सोडा पानी और तिल लगी हुई रोटी इसतम्बूल के मालदार जिलों की सड़कों पर पर थोड़े बहुत पैसे कमाने के लिये बेचा करते थे।

रजब तैय्यब अर्दोगान-नींबू पानी बेचकर गुज़ारा बचपन, आज हैं इस्लामिक मुल्कों के हीरो

तय्यब एर्दोगान ने हमेशा अपनी छवि को एक मुस्लिम रहनुमा के रूप में पेश किया है,एक विशाल रैली में खुलेआम उन्होंने अपनी एक कविता पढ़ी थी जिसके कारण उन्हें दस महीने की जेल हुई थी।

''मस्जिदें हमारे बैरिक्स हैं, और गुम्बन्द हमारे हैलीमेट हैं ,और मिनार हमारे हथियार हैं ,और हमारे फौजी वफादार हैं। इस कविता ने पूरे तुर्की में आग की तरह फैल गई और बच्चे की ज़बान पर आगई जिससे डरकर सरकार ने तय्यब को सज़ा सुनाई''।

1994 में तय्यब एर्दोगान ने राजनीति की पहली सीढ़ी पर क़दम रखा और इसतम्बूल शहर के मेयर चुने गए,इसतम्बूल की जनता को पानी की सत्तर साल पुरानी समस्या को पाईप लाईन बिछवाकर खत्म कर दिया


सफाई सुथराई एवम् ट्रैफिक के सिस्टम को सुधारने पर विशेष ध्यान जिसके कारण जनता में उनका कद और बढ़ गया यहां तक ​​कि उनके आलोचकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक अच्छा काम किया है।