पूर्व सैनिक मोहम्मद सनाउल्लाह  को विदेशी घोषित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है।  साल 2009 में इस मामले की जांच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह गलत पहचान का मामला है।  

'विदेशी' का ठप्पा , जेल से रिहा होकर करगिल नायक मोहम्मद सनाउल्लाह ने सुनाई आपबीती

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सनाउल्लाह ने कहा, ‘उनका दिल टूट गया है. भारतीय सेना में तीस साल तक सेवा देने के बाद मुझे यह ईनाम मिला है।’

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में करगिल युद्ध लड़ने वाले मोहम्मद सनाउल्लाह ने बताया, जेल के गेट से अंदर जाते हुए, मैं बहुत रोया...


मैंने खुद से पूछा कि तीन दशकों तक अपनी मातृभूमि की सेवा करने के बाद मुझसे कौन सा ऐसा पाप हो गया है जिसकी वजह से मुझे एक विदेशी बताकर हिरासत में रखा जा रहा है।  

असम के गोलपारा के हिरासत शिविर से भारतीय सेना के पूर्व सूबेदार मोहम्मद सनाउल्लाह 8 जून को रिहा हो गए,


लेकिन वह उस दिन को कभी नहीं भूल पाएंगे जब उन्हें अवैध विदेशी बताकर जेल भेज दिया गया था।  

52 वर्षीय सनाउल्लाह अगस्त 2017 में ही इलेक्ट्रोनिक एंड मैकेनिकल इंजीनियर विभाग (EME) में सूबेदार के पद पर रिटायर हुए हैं।


उन्होंने 21 मई 1987 को आर्मी जॉइन की थी और 2014 में उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से पदक भी मिल चुका है।  रिटायरमेंट के बाद सनाउल्लाह असम सीमा पुलिस में बतौर सब-इंस्पेक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  

9 मई को असम के कामरूप जिले के गांव कोलोहिकाश के निवासी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर दिया गया था। 


कामरूप जिले के अपर पुलिस अधीक्षक संजीब सैकिया ने बताया था कि 2008 में सनाउल्लाह का नाम मतदाताओं की सूची में ‘डी’ (संदिग्ध) मतदाता के रूप में दर्ज किया गया था।