भोपाल एयरपोर्ट रोड इंद्रविहार कॉलोनी स्थित फैज मस्जिद से ऐसे ही नल लगाए गए है। जिसका रिजल्ट काफी अच्छा मिला है नतीजा यह है कि जहां वुजू के लिए रोज दो से ढाई टैंकर पानी खर्च हो रहा था, वहीं अब केवल एक ही टैंकर से काम हो जाता है। 

एक टैंकर में करीब 5 हजार लीटर पानी रहता है, इस हिसाब से रोज करीब 12 हजार 500 लीटर पानी लगता था।


इस स्कीम से अब रोज सिर्फ एक टैंकर (5000 हजार ली.) पानी ही लग रहा है। अब हर महीने सवा दो लाख लीटर पानी की बचत होने लगी है। 

पानी बचाने की मुहिम को और अधिक कारगर बनाने की दिशा में अब भोपाल की मस्जिदों में भी प्रयास शुरू हो गए हैं। इनमें नमाज के लिए किए जाने वाले वुजू के दौरान भी उतना ही पानी खर्च होगा, जितनी जरूरत है।
वुजू में जो पानी व्यर्थ बह जाता है, उसे रोकने के लिए नई तकनीक वाले नल (सेंसर वाले नहीं) लगाए जा रहे हैं, जिनमें लगी राड को टच करने पर ही यह चलेंगे।

फैज मस्जिद भोपाल- वुजू के लिए नई तकनीक के नल, हर माह बचा रहे सवा दो लाख लीटर पानी

 इस मुहिम को नाम दिया गया है पानी बचाओ नेकी कमाओ। मजहबी किताबों में भी उल्लेख है कि वुजू के दौरान भी पानी फालतू जाया न हो।


मसाजिद कमेटी के यासिर अराफात ने बताया कि कई बड़ी मस्जिदों की कमेटियों से भी चर्चा चल रही है। इसके बाद वहां भी इन नलों को लगाया जाएगा। 

इसके बाद यह खुद बंद हो जाएंगे। इस नल में एक छोटी जायस्टिक का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी धुरी पर घूमने वाली एक छड़ से बना होता है। 

इस तकनीक का मकसद यह है कि अक्सर लोग मुंह-हाथ धोते समय नल खुला छोड़ देते हैं और एेसे में काफी पानी व्यर्थ बह जाता है।


इसे रोकने के लिए ही इस तरह के नल लगाए गए हैं, जिनमें टोंंटी की जगह केवल एक पतली नली है, जिससे पानी भी पतली धार ही निकलती है।