देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करवाने के लिए हजारों देशभक्तों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। 

 
इन महान देभक्तों में जनरल शाहनवाज खान का नाम बड़े आदर और मान से लिया जाता है। 


आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान महान देशभक्त, सच्चे सैनिक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबियों में शुमार थे।  

आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान का जन्म ब्रिटिश इंडिया में 24 जनवरी 1914 को गावं मटौर, जिला रावलपिंडी में जंजुआ राजपूत कैप्टन सरदार टीका खान के घर हुआ था।  

1940 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक अधिकारी के तौर पर ज्वाइन कर लिया।  
जब जनरल शाहनवाज ब्रिटिश आर्मी में शामिल हुए थे, तब विश्व युद्ध चल रहा था और उनकी तैनाती सिंगापुर में थी।  
जापानी फौज ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैंकड़ों सैनिकों को बंदी बनाकर जेलों में ठूंस दिया था।  

1943 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर आए और उन्होंने आजाद हिंद फौज की मदद से इन बंदी सैनिकों को रिहा करवाया।  

महान स्वतंत्रता सेनानी, देशभक्त और कुशल राजनेता जनरल शाहनवाज खान को काल के क्रूर हाथों ने हम सबसे से 9 दिसंबर 1983 को हमसे छीन लिया था

जनरल खान  चाहते थे कि उनको लालकिले के पास दफनाया जाए।

लालकिले के पास स्थित जामा मस्जिद के निकट जनरल खान को पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया था।  

जनरल शाहनवाज- जिन्होंने लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराया था

नेताजी के ओजस्वी वाणी और जोशीले नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ से प्रभावित होकर शाहनवाज के साथ सैंकड़ों सैनिक आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए और भारत माता की मुक्ति के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने लगे।  


शाहनवाज खान के देशभक्ति और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर नेताजी ने उन्हें आरजी हुकूमत-ए-आजाद हिंद की कैबिनेट में शामिल किया था।

 
दिसंबर 1944 में जनरल शाहनवाज को नेता जी ने मांडले में तैनात सेना की टुकड़ी का नम्बर 1 कमांडर नियुक्त किया था।  

आजाद हिन्दुस्तान में लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराने वाले जनरल शाहनवाज ही थे। 


देश के पहले तीन प्रधानमंत्रियों ने लालकिले से जनरल शाहनवाज का जिक्र करते हुए संबोधन की शुरुआत की थी।  

लाल किले पर पहला तिरंगा जनरल शाहनवाज खान ने ही फहराया था। 


उनका जन्म 24 जनवरी 1914 में हुआ था और आज उनका जन्म दिन है।  


इस मौके पर हम आपको उनकी याद दिलाकर ये साबित करना चाहते हैं की जंगे आज़ादी में मुसलमानो क्या किरदार था।