खाली रह जाती हैं सीटें

कोटा बढ़ाने की बात जरूर हो रही है, लेकिन कई बार ऐसा हुआ है कि भारत को जो कोटा मिला है उतने लोग भी हज यात्रा पर नहीं जा पाते।


उदाहऱण के लिए 2017 में भारत को 1,25,025 हज यात्रियों का कोटा मिला था, लेकिन उसके मुकाबले मात्र 1,24,852 यात्री ही जा पाए। 

हाल ही में जी 20 शिखर सम्मेलन में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से मुलाकात कर हज यात्रा के लिए भारतीय मुसलमानों का वार्षिक कोटा दो लाख बढ़वा लिया है।

2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 13.8 करोड़ से अधिक की मुस्लिम आबादी थी। उस लिहाज से 1,38,000 का कोटा होना चाहिए था।


हालाँकि, उस समय भारत का कोटा 1,25,000 था।

2013 से 2016 तक सऊदी के हरम शरीफ में निर्माण कार्य के चलते भारत के कोटे में 20 फीसद कटौती की गई थी। इसे 1,36,020 कर दिया गया था, जो 2012 में करीब 1,70,000 था।


2017 में 34, 005 का कोटा बढ़ाया गया था, जबकि 2018 में मात्र 5,000 ही बढ़ा था।

ऐसा भी नहीं है कि कोटा एक बार निर्धारित हो जाता है, फिर कम नहीं होता है। यह सऊदी सरकार के ऊपर निर्भर है।


वह कारण और परिस्थितियों के आधार पर हज का कोटा घटा भी सकती है। 

अपने दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ सबका विकास नारे में सबका विश्वास भी शामिल कर लिया।


सभी वर्गों का विश्वास जीतने के लिए इस दिशा में ये एक कदम के तौर देखा जा सकता है। 

इस समय भारत में अनुमानित मुसलमानों की आबादी 17.2 करोड़ मानी जा रही है। ऐसे में भारत का कोटा 1.72 लाख होना चाहिए।

जानें कैसे तय होता है हज कोटा,दस लाख मुस्लिम आबादी पर एक हजार को हज की अनुमति

कैसे तय होता है हज कोटा

सऊदी अरब मुस्लिम आबादी के आधार पर देशों को कोटा आवंटित करता है। उदाहरण के तौर पर हर 10 लाख मुसलमानों में 1,000 तीर्थयात्री।