अल्लाह के नबी से सही बुखारी,सही मुस्लिम,सुन्न इब्न माज़ा में कई हदीस हिजामा थेरेपी के बारे में मौजूद हैं कि हिजामा जैसी बहतरीन थेरैपी हमें अल्लाह के नबी की सुन्नत से मिली है,लेकिन इस बारे में पता नही है और बहुत कम लोग ही इससे वाकिफ़ हैं।  

कपिंग करने के तीन से पांच मिनट बाद असंतुलित खून जमा हो जाता है। जमा हुए खून को निकाल दिया जाता है।


अगर बीमारी शुरुआती हो तो दो सीटिंग में बीमारी खत्म हो जाती है, वरना तीन-चार सीटिंग की जरुरत होती है। 

हिजामा थेरेपी में शरीर से खून निकालकर बीमारी दूर की जाती है। सालों पुरानी इस पद्धति को कपिंग थेरेपी भी कहते हैं। माइग्रेन, जॉइंट पेन, कमर दर्द, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल डिस्क, पैरों में सूजन, सुन्न होना और झनझनाहट जैसी बीमारी का इलाज मिनटों में संभव है। 

कपिंग थेरेपी या हिजामा उस क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है जहां कप लगाए जाते हैं। इससे मांसपेशी को तनाव से छुटकारा मिल सकता है, जो समग्र रक्त प्रवाह में सुधार करता है और कोशिका के मरम्मत की गति को बढ़ावा देता है।


यह नए आस-पास जुड़े हुए ऊतकों की भी मदद कर सकता है और ऊतक में नई रक्त वाहिकाओं को बनाता है।

लोगों में कपिंग थेरेपी (हिजामा) के लिए इन दिनों बहुत उत्साह है, पश्चिमी देशों की कई बड़ी-बड़ी हस्तियां और ओलंपिक एथलीट इस विशेष चिकित्सा के लिए कतार में हैं।


कपिंग थेरेपी एक प्राचीन पारंपरिक और सहायक चिकित्सा अभ्यास है। हाल ही में, दर्द से संबंधित बीमारियों के इलाज में इसके संभावित लाभों के बढ़ते सबूत देखे गए हैं।

बीमारी के अनुसार गर्दन या गर्दन के नीचे या पीठ में कपिंग की जाती है। कपिंग के लिए शीशे का कप यूज करके वैक्यूम पैदा किया जाता है ताकि कप बॉडी से चिपक जाए।


अब इसके लिए मशीन का यूज किया जाने लगा है। जिस पॉइंट पर बीमारी की पहचान होती है, वहीं पर कपिंग की जाती है। 

हिजामा थेरैपी जो हमें अल्लाह के नबी की सुन्नत से मिली है, आज दुनिया बता रही अनेक फ़ायदे

हिजामा थेरेपी प्राकृतिक चिकित्सा की सबसे पुरानी पद्घति है। समय के साथ-साथ हम इस पद्घति को भूलते चले गए।


अब समय आ गया है कि फिर से हिजामा थेरेपी को जिंदा किया जाए। हाल ही में जामिया नगर के यूनानी रिसर्च सेंटर में 10 दिन तक हिजामा थेरेपी की ट्रेनिंग दी गई।