बटवारे से पहले इन तीनों दोस्तों ने भारत के लिए कई लड़ाई लड़ी। दूसरे विश्वयुद्ध में भी साथ लड़े। लेकिन 24 साल बाद 1971 की जंग में आमने सामने थे और इस जंग में पाकिस्तान को सरेंडर करना पड़ा था।


उस वक़्त इदरीश अस्सिस्टेंट एयर चीफ के पद पर थे। मिग-23 और बाद में मिग-25 को इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।

देश के पहले मुस्लिम एयर फोर्स चीफ जिन्होंने 1971 में पाक को सिखाया सबक
9 जून, 1923 में इदरीश का जन्म हैदराबाद में हुआ था।  वो एक मात्र ऐसे मुस्लिम एयर फोर्स अफसर थे जो एयर चीफ मार्शल के पद पर पहुंचे थे। एक मई, 2018 को 94 वर्ष की उम्र में उनका इंतकाल हो गया था।  

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आज आज़ाद भारत के पहले मुस्लिम एयर फोर्स चीफ इदरीस हसन लतीफ का जन्मदिवस मनाया जा रहा है।


9 जून, 1923 को जन्मे इदरीश का जन्म हैदराबाद में हुआ था। इदरीस का बीते साल 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 

इदरीश देश के 10वें वायु सेना प्रमुख बने थे। 


देश के बंटवारे के वक़्त जहां एक तरफ़ इनके दोस्त मलिक नूर और असग़र खान पाकिस्तान चले गए और वहां के सेना प्रमुख बने जबकि इदरीश ने अपने दोस्तों के बहुत बुलाने पर भी पाकिस्तान नहींं गए और हिंदुस्तान में रहते हुए ही एयर चीफ़ बने।  

जन्मदिन मुबारक-भारत के पहले मुस्लिम एयर फोर्स चीफ इदरीस हसन लतीफ 

1947 में भारत विभाजन के समय उन्हें पाकिस्तान व इंडियन दोनों एयरफोर्स में शामिल होने का विकल्प मिला, लेकिन उन्होंने भारत का ही विकल्प चुना।


बाद में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल और फ्रांस में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया।