वह विदेश में पढ़ती जरूर रहीं लेकिन मन अपने वतन की बाट जोहता रहा। इसके लिए वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारियों में लगी रहीं।


मां से भी लगातार सहयोग मिलता रहा। इल्मा विदेश में कोई नौकरी कर ज्यादा पैसा कमाने की भूख शांत करने के नहीं, अपने वतन की सेवा के सपने देखा करती थीं। उनका सपना पूरा हुआ। वह एग्जॉम क्वालिफाइ कर गईं।

इल्मा अफ़रोज़ कहती हैं - 'चौदह साल की उम्र में पिता मझधार में छोड़ गए। मां के साथ खेती करने लगी, साथ ही ट्यूशन पढ़ा कर घर-परिवार संभालने लगी।


सिर्फ छात्रवृत्ति के पैसे से अमेरिका, ऑक्सफोर्ड, फ्रांस तक पढ़ाई की, अब मैं आईपीएस बन गई हूं। इस कामयाबी में हमेशा मां का हौसला मेरे साथ रहा। उपराष्ट्रपति ने मुझे सराहा।'

हाल ही में दिल्ली में सिविल सर्विसेज में चयनित प्रतिभागी अभिनंदन समारोह-2018 में मुख्य अतिथि एवं उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू की उपस्थिति में आईपीएस इल्मा अफरोज को सम्मानित किया गया।


उप राष्ट्रपति के साथ उनकी यादगार ग्रुप फोटोग्राफी भी हुई। उप राष्ट्रपति ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह देश के निर्धन परिवारों के युवाओं के भविष्य के लिए हमेशा सक्रिय रहें।


इस अवसर पर इल्मा की मां सुहैला अफरोज को भी सम्मानित किया गया। इल्मा कहती हैं - 'ये देश मेरा है और मैं इस देश की हूं। देश और कर्तव्यों के लिए चाहे जान की बाजी क्यों न लगानी पड़े, कभी गलत कार्य बर्दाश्त नहीं करेगी।

इल्मा अफ़रोज़-UPSC क्वालिफ़ाई करने वाली एक किसान परिवार की बेटी

मुरादाबाद के कुंदरकी की एक बिटिया इल्मा अफ़रोज़ 

इल्मा अफ़रोज़-UPSC क्वालिफ़ाई करने वाली एक किसान परिवार की बेटी, बचपन में ही जिनके वालिद गुज़र गये, मॉं ने बडी मशक्क़तों से पाला पोसा।


ट्यूशन पढ़ाकर मां ने भरी स्कूल की फीस, काबिलियत साबित कर बेटी बनी आईपीएस।  


ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज में 217वीं रैंक हासिल करने वाली इल्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है।

 उसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चली गईं।

जब किसी किसान घर की बेटी खेतों में काम करती हुई बेहद चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक सिविल सेवा परीक्षा में ऊंची छलांग लगाती है, उसके घर-परिवार ही नहीं, पूरे इलाके का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।


और ऐसी कामयाबी पर देश के उपराष्ट्रपति स्नेह से उसकी पीठ थपथपाएं, फिर तो वाह, क्या कहने, जैसे सोने में सुगंध का सुख। हाल ही में ऐसी ही बुलंदी को छुआ है कुंदरकी, मुरादाबाद (उ.प्र.) के पूर्व चेयरमैन काजी हबीब के चार बेटों में एक किसान अफ़रोज़ की बड़ी बिटिया इल्मा अफ़रोज़ ने।


इल्मा ने जैसे ही आइपीएस की परीक्षा पास की, घर जश्न में डूब गया। बस गम रहा तो सिर्फ इस बात का, कि इस खुशहाली के मौके पर पिता कारी अफरोज अहमद नहीं रहे। उनका लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो चुका है। इल्मा की मां सुहैला अफरोज भी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। वही घर की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

इल्मा के घर में हमेशा से पढ़ाई-लिखाई का माहौल रहा है। उनकी मां गरीब बच्चों को बिना कोई फीस लिए पढ़ाती हैं।


उन्होंने अपनी मेधावी बिटिया के लिए भी रात-दिन एक कर दिया था।


अब, जबकि बेटी को बड़ी कामयाबी मिली है, जैसे उनकी जीवन भर की मेहनत सार्थक हो उठी है।


जब पिता अफ़रोज़ का इंतकाल हो गया था, इल्मा अपनी मां और भाई के साथ खेतों में हाथ बंटाने लगी थीं, साथ ही किसी तरह पढ़ाई भी चलती रही।