आपकी जानकारी के लिए बताते चले कि सेना में पंडित, पुजारी, गोरखा पंडित, मौलवी सुन्नी और शिया, पादरी, ग्रंथी नियुक्त होते हैं। इनका काम बटालियन में स्थित धार्मिक स्थलों में पूजा या इबादत कराना होता है।

सुन्नी बरेलवी मसलक के उलेमा से भी केंद्र का संपर्क,बरेलवी मौलवी भी सेना में धर्मगुरु बनेंगे

केंद्र सरकार ने देवबंद दारुल उलूम के बाद सुन्नी बरेलवी मसलक के उलेमा से भी संपर्क साधा है।

बरेलवी मसलक के 100 से ज्यादा आलिम, कामिल लोगों की सूची केंद्र सरकार ने मांगी है। ऐसे डिग्रीधारक युवाओं को सेना में धर्मगुरु बनाने की पहल शुरू हो गई है।  

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सेना भर्ती के अपर महानिदेशक सुभाष शरण ने शनिवार रात दारूल उलूम के सर्वेसर्वा मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी से मुलाकात की थी। 

सुन्नी बरेलवी मुसलमानों का सबसे बड़ा मरकज बरेली को कहा जाता है। यहां पर बड़े मजहबी रहनुमा ने दुनिया भर में बरेली की पहचान बनाई है।

इस दौरे में मेजर जनरल डा. सुभाष शरण ने दारुल उलूम के युवाओं को भारतीय सेना और सेना में अवसरों की जानकारी दी थी।

तन्जीम उलमा-ए-इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है कि केन्द्र सरकार के दूत की हैसियत से सेना के जनरल देवबंद गए थे, जिसका हम स्वागत करते हैं।

बरेलवी मसलक के 100 से ज्यादा आलिम, कामिल लोगों की सूची केंद्र सरकार ने मांगी है। ऐसे डिग्रीधारक युवाओं को सेना में धर्मगुरु बनाने की पहल शुरू हो गई।


बरेलवी मसलक के उलेमा ने प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की सराहना की है।