इसी इलाके के रहने वाले गैर पंडित नागरिक मुख्तार अहमद ने कहा कि हम सभी पंडितों से अपील करते हैं कि वे वापस श्रीनगर आकर बसें और अपना बिजनेस यहां शुरू करें। 


रौशन लाल ने भी अन्य पंडितों से अपील करते हुए कहा कि वे यहां वापस अपने घर लौट जाएं क्योंकि अब यहां कोई डर नहीं है।


संदीप ने कहा कि मेरे पिता की वापसी के बाद अन्य कई कश्मीरी पंडित यहां आने के लिए तैयार होंगे। 

कश्मीर से एक बार फिर से अमन की खुशबू आने के संकेत मिलते नजर आ रहे हैं। दरअसल 90 के दशक में आतंकी हमलों के बाद श्रीनगर से पलायन कर गए कश्मीरी पंडितों की अब फिर से श्रीनगर वापसी हो रही है।
खबर के मुताबिक 74 वर्षीय कश्मीरी पंडित रोशन लाल मावा जो 1990 अक्टूबर में गोलियों से छलनी हो गए थे जिसमें वे बुरी तरह से घायल हो गए थे। 

रौशन के दो लड़का और एक लड़की है। एक बेटा बेंगलुरु में इंजीनियर है जबकि दूसरा बेटा संदीप कश्मीर में ही एक एनजीओ चलाता है जो कश्मीरी पंडितों के सकुशल वापसी के लिए काम करता है।


संदीप ने कहा कि मैंने अपने पिता रौशन लाल से कहा कि वे वापस श्रीनगर लौट जाएं और अपना काम शुरू करें। मेरा मानना था कि जो काम मैं करना चाहता हूं उसकी शुरुआत मेरे घर से ही हो (चेरिटी बिगिन्स एट होम) तो बेहतर होगा। 

रौशन लाल ने बताया कि मैंने अपना बीता हुआ कल भुला दिया है और अब एक नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत करना चाहता हूं। मेरे घर और दुकान के पास रहने वाले मुस्लिम परिवार ने ना सिर्फ मेरा खुले दिल से स्वागत किया है बल्कि मुझे उन्होंने पगड़ी भी पहनाई। मेरे बेटे को भी उतना ही सम्मान मिल रहा है जितना दूसरों को। 

उन्होंने अब श्रीनगर के जैना कडाल में गाडा कोचा में अपने दुकान को दोबारा से खोल दिया है। बुधवार को ये कश्मीरी पंडित श्रीनगर वापस आ गए हैं।


तीस साल पहले इस कश्मीरी पंडित को हमले के बाद यहां से निकाल दिया गया था। 

30 साल बाद कश्मीरी पंडित की हुई श्रीनगर वापसी, खुले दिल से मुसलमानो ने किया स्वागत