बादशाह खां पूरी तरह से भारत विभाजन के खिलाफ थे, दूसरी ओर तब के सभी बड़े नेता इसके सपोर्ट में थे। गांधी जैसे लोग भी मूक-दर्शक बन गए थे। 


इंदिरा गांधी ने उनके लिए एक बार कहा था, ''बादशाह खान के दयालु व्यक्तित्व से आशा की जा सकती है कि वे हमारी विफलताओं को क्षमा कर पाएंगे।''

जो शख़्स नोबेल पुरस्कार के लिए दो बार नामित हुआ था। जिस शख़्स का क़द अगर देखा जाए तो महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग, अब्राहम लिंकन के बराबर निकलेगा।


जिस शख़्स के पूरे जीवनकाल में एक भी दाग़ न हो। महात्मा गांधी से असहमति रखने वाले लोग मिल जाएँगे पर उस शख़्स का कभी कोई विरोधी न हुआ।


सम्पन्न परिवार से होने के बावजूद जिस शख़्स ने बेहद सादगी की तरह इंसानियत के लिए संघर्ष करते हुये ज़िंदगी जिया, ऐसी मिसाल दुनिया के इतिहास में देखने को कम मिलती है।

खान ग़फ़्फ़ार खान-पुण्यतिथि-बनाई थी पठानों की फौज, कुरान से सीखा अंहिसा का पाठ

जिस शख़्स ने इस मुल्क के लिए सबसे अधिक कुर्बानी दी, जिसने दुनिया की इतिहास में सबसे अधिक दिन जेल में बिताया।


मानवता एवं शांति के लिए संघर्ष करते हुये अपने जीवन का लगभग चार दशक जेल में इसलिए बिता दिया ताकि ये दुनिया इंसानों को रहने लायक एक बेहतर जगह बन सके। 

- पुण्यतिथि पर खिराज ए अक़ीदत...!!


भारत की आजादी में खान अब्दुल गफ्फार खान के रोल को भुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर अहिंसा आंदोलन की शुरुआत की। अपने जीवन के 42 साल ब्रिटिश राज और फिर पाकिस्तान की जेलों में गुजारे थे। आज उनकी 28वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है।  

उस शख़्स को बदले में इस मुल्क ने क्या दिया? सिवाय एक मार्केट का नाम रखा “ग़फ़्फ़ार मार्केट” जहाँ चोरी का सामान मिलता है।


ऐसे ऐसे लोगों के नाम पर सड़क/विश्वविद्यालय/संस्थान/एयरपोर्ट/स्मारक मिल जाएगा जिन लोगों का देश के लिए रत्ती भर योगदान नहीं रहा है।


पर खान ग़फ़्फ़ार खान जैसे महान लोगों के नाम पर इस मुल्क में कहीं कुछ भी नहीं मिलेगा। खान ग़फ़्फ़ार खान साहब की विरासत उनके ही खून से सींचे हुये मुल्क में ढूँढने पर नहीं मिलती।

20 जनवरी, 1988 के दिन खान अब्दुल गफ्फार खान का निधन हो गया था। इसके एक साल पहले उन्हें भारत रत्न दिया गया।


उन्हें बादशाह खां और सीमांत गांधी जैसी उपाधियों से नवाजा गया। पाकिस्तान में वह बाचा खान के नाम से मशहूर हैं।


बादशाह खां ने अपने भाई के साथ मिलकर पठान सीमा प्रांत में पठानों की एक बड़ी 'खुदाई खिदमतगार' अहिंसक फौज बनाई।