लांस नायक नज़ीर अहमद वानी- देश के लिए कुर्बान कर दी थी जान, अब मिलेगा अशोक चक्र

अशोक चक्र भारत का शांति के समय दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।
वानी को आतंकवादियों से लड़ने में अदम्य साहस का परिचय देने के लिए सेना पदक भी दिया गया।


जम्मू-कश्मीर की कुलगाम तहसील के अश्मूजी गांव के रहने वाले नज़ीर एक समय खुद आतंकवादी थे। वानी जैसों के लिए कश्मीर में ‘इख्वान’ शब्द इस्तेमाल किया जाता है।


बंदूक थामकर वह जाने किस-किससे किस-किस चीज़ का बदला लेने निकले थे। पर कुछ वक्त बाद ही उन्हें गलती का अहसास हो गया और वह आतंकवाद छोड़कर सेना में भर्ती हो गए।

राष्ट्रपति के सेक्रटरी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में खा गया है ,


‘लांस नायक वानी ने दो आतंकियों को मारने और अपने घायल साथी को बचाते हुए सबसे बड़ा बलिदान दिया।


खतरा देखते हुए आतंकियों ने तेज गोलीबारी शुरू कर दी और ग्रेनेड भी फेंकने लगे। ऐसे अकुलाहट भरे वक्त में वानी ने एक आतंकी को करीब से गोली मारकर खत्म कर दिया।’

अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि 38 वर्षीय वानी कुलगाम के अश्मुजी के रहने वाले थे। 
वह 25 नवंबर को भीषण मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे।


शुरू में आतंकी रहे वानी बाद में हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट आए थे। वह 2004 में सेना में शामिल हुए थे।


अधिकारियों ने बताया कि वानी दक्षिण कश्मीर में कई आतंकवाद रोधी अभियानों में शामिल रहे।  

लांस नायक नज़ीर अहमद वानी-आतंक की राह छोड़ सेना में हुए थे  शामिल, देश के लिए कुर्बान कर दी थी जान, अब मिलेगा अशोक चक्र


कश्मीर के शोपियां में गत वर्ष नवंबर में आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान अपनी जान कुर्बान करने वाले लांस नायक नजीर अहमद वानी को अशोक चक्र प्रदान किया जाएगा।