सेना के एक अधिकारी ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद में स्थित दारूल उलूम के छात्राें से सेना में भर्ती हाेने की अपील की है। 


उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड जोन के भर्ती निदेशालय के एडीजी मेजर जनरल डा. सुभाष शरण ने दारुल उलूम के युवाओं को भारतीय सेना और सेना में अवसरों की जानकारी दी।

दारुल के डेढ़ सौ साल के इतिहास में यह पह मौका है जब कोई सेना का अधिकारी वहां युवाओं को आर्मी में करियर के लिए प्रोत्साहित करने पहुंचा हो। 

जनरल शरण ने बताया वह पीएम मोदी के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र से प्रेरित हैं।

सेना में हर धर्म गुरुओं की भर्ती होती है जिसमें बड़ी संख्या में मौलवियों के पद भी शामिल हैं। धर्म गुरुओं का काम सेना या संबंधित बटालिय में स्थित धार्मिक स्थलों में पूजा, प्रार्थना या इबादत कराना होता है।


जिन धर्म गुरुओं की सेना में भर्ती होती है उसमें पंडित, पादरी, ग्रंथी, बौद्ध मोंक और मौलवी होते हैं।

उन्होंने कहा कि सेना में भर्ती के लिए दारुल उलूम को सभी जरूरी नियमों से अवगत कराया जाएगा। तांकि यहां के युवा सेना में शामिल हो सकें।

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मेजर जनरल ने किया दारुल उलूम देवबंद का दौरा, अब आर्मी में भर्ती होंगे मदरसा छात्र

दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि डेढ़ सौ साल के इतिहास में पहली बार कोई सैन्य अधिकारी दारुल उलूम में युवाओं को सेना में करियर की राह दिखाने के लिए पहुंचे हैं।


उन्होंने मेजर जनरल सुभाष शरण को दारुल उलूम के इतिहास पर लिखी किताब भी भेंट की।

एडीजी ने दारुल उलूम के शिक्षकों व छात्रों को श्रीमदभगवद्गीता में निहित युद्ध रणनीतियों की जानकारी दी। बताया कि गीता मनुष्य के जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है।

उन्होंने दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी को इस्कॉन के संस्थापक आचार्य एसी भक्ती वेदांत प्रभुपद द्वारा लिखी श्रीमदभगवद्गीता की अलग-अलग भाषा में प्रतियां भेंट कीं।