मौलाना मोहम्मद अली जौहर के जीवन परअगर नज़र डालें तो भारतीय इतिहास में उनका सबसे बड़ा कारनामा ख़िलाफ़त तहरीक है।  

यही वह प्लेटफार्म था, जहां से महात्मा गांधी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत की. ख़िलाफ़त तहरीक ने हिंदुओं और मुसलमानों को अंग्रेज़ों के विरुद्ध ला खड़ा किया।  

Maulana-Mohammed-ali-jauhar-a-great-freedom-fighter

​​मौलाना के द्वारा शुरी की गयी ख़िलाफ़त तहरीक ने हिंदुओं और मुसलमानों को अंग्रेज़ों के विरुद्ध ला खड़ा किया।  

दोनों ही संप्रदायों ने बड़े जोश और जज़्बे के साथ अंग्रेज़ों के ख़िला़फ कड़े क़दम उठानेशुरू किए,ताकि भारत को आज़ाद कराया जा सके।  

इसके लिए मौलाना ने हरतरह की यातनाएं सहीं।  वह मरते दम तक अंग्रेज़ों से इस बात के लिए लड़ते रहे कि यातो देश आज़ाद करो या फिर मरने के बाद दो गज़ ज़मीन अपने देश में दे दो।


वह किसी गुलाम देश में मरना नहीं चाहते थे और इतिहास गवाह है कि उन्होंने अपना वचन पूरा करकेदिखा दिया।  

हम यह कह सकते हैं कि मौलाना जौहर ने साहित्य, राजनीति एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में जो कुछ भी विरासत छोड़ी, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है।  

ज़रूरत इस बात की है कि उन पर पुन: अध्ययन किया जाए और मौलाना को उनका सही मुक़ाम दिया जाए।  मौलाना मोहम्मद अली जौहर एक महान स्वतन्त्रता सेनानी, जिसे भुला दिया गया।  

मौलाना मोहम्मद अली जौहर 1878 में रामपुर में पैदा हुए. बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के कारण पालन-पोषण और शिक्षा की ज़िम्मेदारी उनकी मां को निभानी पड़ी।  
रिवायत के अनुसार, उर्दू और फ़ारसी की प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई, इसके बाद उन्होंने बरेली से हाईस्कूल किया।  
आगे की पढ़ाई के लिए वह अलीगढ़ गए और वहीं उन्होंने बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की।  

हमदर्द अख़बार  मौलाना जौहर ने भारतीय जनता और ख़ासकर मुसलमानों के प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए निकालना शुरू किया था।  

मौलाना का यह सिद्धांत था कि कोई भी ख़बर बिना प्रमाण के प्रकाशित न की जाए।   मौलाना अख़बार में विज्ञापन छापनेके कड़े विरोधी थे। 


अगर वह चाहते तो ऐसा करके बहुत पैसा कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने आर्थिक लाभ के बजाय पत्रकारिता केसिद्धांतों को वरीयता दी।  

मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहरः महान स्वतंत्रता सेनानी जिन की क़ुर्बानी को भुला दिया गया

मौलाना ने  दो अख़बार निकाले कामरेड और हमदर्द। कामरेड अंग्रेज़ी का अख़बार था, जबकि हमदर्द उर्दू का अख़बार थे।  

कामरेड एक ऐसा अंग्रेज़ी अख़बार था, जिसका लोहा अंग्रेज़ भी मानते थे और उसके महत्व का अनुमान इसीबात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेज़ कामरेड की कॉपी अपने दोस्तों के लिए बतौर तोहफ़ा लंदन ले जाते थे।