पुराने फ़िल्म प्रचारक रहे और रफ़ी साहब पर 'एक फ़रिश्ता था वो' और 'वो जब याद आए' जैसी पुस्तक लिख चुके धीरेन्द्र जैन बताते हैं,

"नौशाद साहब ने ही मुझे बताया था कि रफ़ी साहब ने हज से लौटकर फ़िल्मों में गाना बंद कर दिया था।  

जैन आगे बताते हैं, "तब नौशाद साहब ने उन्हें समझाया कि यह गाना छोड़ कर ग़लत कर रहे हो मियां।  ईमानदारी का पेशा कर रहे हो, किसी का दिल नहीं दुखा रहे।


यह भी एक इबादत है और अब बहुत हो गया, अब गाना शुरू कर दो. तब रफ़ी साहब ने फिर से गाना शुरू कर दिया।"

मोहम्मद रफ़ी ने हज  करने के बाद जब मौलवियों के कहने पर छोड़ दिया था गाना

रफी साहब एक सीधे-सच्चे और बेहद शरीफ इंसान थे। वह लोगों की बातों में आ गए और उन्होंने गाना छोड़ दिया. जिससे फिल्मी दुनिया में हड़कंप मच गया। 

 
तब कितने समय तक रफ़ी साहब ने गाने नहीं गाए और क्या नौशाद साहब के समझाने पर ही उन्होंने फिर से गाना शुरू किया।  

एक बार हरदिल अज़ीज़ और महान गायक मोहम्मद रफी ने भी मौलवियों के कहने पर तब फिल्मों में गाना बंद कर दिया था, जब वह अपने करियर के शिखर पर थे।  
लेकिन जल्द ही रफी साहब को यह एहसास हो गया कि फिल्मों में गाना कहीं से भी ग़लत नहीं है। वरना दुनिया ऐसे सैकड़ों नगमों से महरूम रह जाती जो उन्होने एक ब्रेक के बाद फिर से गाए।  

हज जाने से पहले मिल गए थे 5 फ़िल्मफेयर


रफ़ी साहब को अपने करियर में कुल 6 फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिले। जिनमें 5 पुरस्कार उनको हज जाने से पहले 1968 तक मिल गए थे। 


वे गीत थे- 'चौदहवीं का चाँद हो तुम', 'तेरी प्यारी प्यारी सूरत को', 'चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे', 'बहारों फूल बरसाओ' और 'दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। 

आज भी रफ़ी साहब किस तरह देश दुनिया में लोगों के दिल में बसे हैं, वह सब किसी से छिपा नहीं है। रफ़ी साहब के इंतक़ाल को अगले साल जुलाई में 40 बरस हो जाएँगे। 


लेकिन रफ़ी के गीत आज भी उतने लोकप्रिय हैं, जितने उनके रहते थे।  

हज से वापसी के एक अंतराल के बाद रफ़ी ने फिर से फ़िल्मों में गीत गाना शुरू किया तब भी उन्होंने एक से एक सुंदर गीत अपने श्रोताओं को दिए। 

यहाँ तक कि 1977 में आई फ़िल्म 'हम किसी से कम नहीं' के एक गीत 'क्या हुआ तेरा वादा' के लिए रफ़ी को पहली बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।साथ ही इसी गीत के लिए उन्हें छठी बार फ़िल्मफेयर पुरस्कार पाने का मौक़ा भी मिला।  

हज से लौटकर क़रीब कई महीने तक रफ़ी साहब ने किसी गीत की रिकॉर्डिंग नहीं की थी।


उनको मौलवियों ने कहा था कि हज के बाद नाचना गाने की इजाज़त हमारे दीन धर्म में नहीं है, इसलिए आप अब गाना बंद कर दीजिए।"

यह बात तब की है जब मोहम्मद रफी साहब हज पर गए तो उन्हें कहा गया कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसलिए अब आपको गाना-बजाना सब बंद कर देना चाहिए।