एक तरफ अपना आमिर है और दूसरी तरफ अंजना ओम कश्यप और देश के बड़े नाम वाले खबरनवीस। आप ही फैसला कीजिये कौन अपनी ज़िम्मेदारी को सही तरीके से निभा रहा है।  

मुजफ्फरपुर लोकल न्यूज के रिपोर्टर आमिर रिपोर्टिंग छोड़ बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचा रहे

नफरत की आग में जलते समाज के लिए आमिर भाई उम्मीद की ऐसी किरण जो मोहब्बत की खुशबू एक बार फिर घर घर तक पहुंचा सकते हैं।  

मौत के मुंह में जा रहे बच्चे की पल-पल रिकार्डिंग करता और मां की आंसुओं को अपने चैनल की टीआरपी में बदलता।
यही नहीं अगले दिन इस पर डिबेट कराता और साबित कर देता कि उस से बड़ा समाज चिंतक कोई और नहीं हे।  

रिपोर्टिंग के दौरान आमिर ने देखा कि पानी टंकी चौक के निकट बीमार बच्चे को लेकर रो रही मां की कोई सहायता करने वाला नहीं था।

उस मां को पता भी नहीं था कि बच्चे को हाॅस्पीटल पहुंचाने का रास्ता कौन है। वे रिपोर्टिंग छोड़ मां और बच्चे को बाइक पर लेकर अस्पताल पहुंच गए।

असली हीरो आमिर भाई को सलाम जिन्होंने टीआरपी की परवाह किये बग़ैर ऐसे काम को अंजाम दिया जिसकी उम्मीद आज के पत्रकार से कम ही की जाती है।

अगर उनकी जगह दिल्ली के नेशनल चैनल के पत्रकार होता तो क्या करता/करती। तड़प रहे बच्चे की मां के मुंह तक फोंफी (माइक) लगा कर कहता, कि देखिए हमारा समाज व सरकारी व्यवस्था कितना बेरहम है कि एंबुलेंस भी नहीं भेज रहा है।