मेरठ, उत्तर प्रदेश के कस्बा सिवाल खास में मुस्लिम परिवार ने मंदिर के लिए जमीन दान कर सांप्रदायिक सौहार्द का बेहतरीन उदाहरण पेश कर दिखाया।


रिटायर्ड शिक्षक आस मुहम्मद और पत्नी अकबरी ने कस्बे में मंदिर के निर्माण के लिए सौ गज जमीन दान कर दी।


वे कोई बड़े जमींदार भी नहीं हैं बल्कि महज दो बीघा जमीन के मालिक हैं। अयोध्या विवाद पर पति-पत्नी ने कहा कि लोग नेताओं पर नहीं, अदालत पर यकीन रखें। 

चंदा इकट्ठा करने पहुंचे थे लोग 


कस्बा सिवाल खास मुस्लिम बहुल नगर पंचायत है। हिंदू भी रहते हैं। हालांकि इस बस्ती का मजहबी फसाद से दूर तक भी वास्ता नहीं है। कस्बे में एक वर्ष पूर्व हिंदुओं ने हरिजन बस्ती में मंदिर निर्माण का बीड़ा उठाया था।


मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए कुछ हिंदू भाई कस्बा निवासी रिटायर्ड शिक्षक आस मुहम्मद के घर पहुंचे। उनसे मंदिर निर्माण के लिए चंदा मांगा।


आस मुहम्मद की पत्नी अकबरी (67 वर्ष) ने इच्छा जताई कि वह चंदे के रूप में मंदिर निर्माण के लिए 100 गज भूमि दान कर देंगी। पति आस मुहम्मद ने भी रजामंदी जताई। इसके बाद अकबरी ने मंदिर के लिए भूमि दान कर दी। 

यह है असली हिंदुस्तान-मेरठ में मुस्लिम परिवार ने 100 गज जमीन मंदिर के लिए दान दी है

मस्जिद के लिए भी दान की थी भूमि 


इस भूमि पर मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। मंदिर की नींव भरी जा चुकी है और पिलर भी लगने शुरू हो गए हैं। लोगों ने निर्माणाधीन मंदिर में मां दुर्गा की तस्वीर लगाकर पूजा करनी शुरू कर दी है।


बकौल अकबरी, दो वर्ष पूर्व पति ने कस्बे में मस्जिद निर्माण के लिए डेढ़ सौ गज भूमि दान की थी। पति के इस नेक कार्य से ही प्रेरित होकर मैंने अब मंदिर के लिए भूमि दान की है।


अकबरी और आस मुहम्मद का कहना है कि दुनिया का हर मजहब इंसानी खिदमत और मोहब्बत का संदेश देता है। 

साभार- ‘दैनिक जागरण'

निर्माण शुरू 


देश में मंदिर-मस्जिद को लेकर बुलंद नफरत के नारों के बीच इस तरह गुनगुनाए जाने वाले इंसानी तराने निश्चित ही पुरसुकून अहसास दिलाते हैं।


अकबरी और आस मुहम्मद द्वारा दिए गए भूखंड पर मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। कहने को सौ गज जमीन का टुकड़ा ही है, लेकिन इसकी पैमाइश भूगोल और इतिहास नहीं बल्कि इंसानियत के पैमाने पर ही हो सकती है।