मुस्लिम बादशाहों की हुकूमत का रिज़ल्ट, संघ का चश्मा ऊतारकर जानिए

मोहम्मद बिन क़ासिम ने भारत में हक़ और इन्साफ की ऐसी नीति अपनायी के उनसे प्रभावित होकर यहाँ के लोग उनके जाने के बाद उनकी मूर्ति बना कर पूजने लगे थे। 


उन्होंने किसी के साथ अन्याय नहीं किया। उनके बाद के हुक्मरानो ने भी इंसाफ से काम लिया। यही वजह है के मुसलमानों के शासन काल में एक भी दंगा नहीं हुआ और न कभी कोई उपद्रव मचा। 


विकास इस क़दर किया गया के दुनिया भारत को सोने की चिड़िया कहने लगी। दोस्तों 710 से 1857 का समय अंतराल 1,147 साल होता है। मायने कि 1,147 साल मुस्लिम हुकूमत के इतिहास में रंगे है।

हम हुकूमत मैं नहीं रहे तो हमारे साथ अन्याय ही अन्याय हो रहा है। हमें नीस्त ओ नाबूद करने के लिए 69 वर्षों में 70 हज़ार से ज़्यादा फसादात कराये गए।

हमारे व्यवसाय को ख़त्म किया गया। हमारे युवाओं को झूठे इल्जमात में जेल में बंद किया गया।


हमारे खान पान पर बहाने से रोक लगायी गयी।हमारी ज़ुबान को आतंकवादियों की बोली कहा गया। ज़ुल्म की यादि बहोत लंबी है।


देश में किये गए हमारे उपकारों का क्या हमें ऐसा सिला मिलेगा। 

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हर समुदाय को हक़ और इन्साफ दिया। किसी के मज़हब, रीति रिवाज, बोली भाषा, त्यौहार, लिबास, खान पान पर कोई रोक नहीं लगायी। बल्कि उन्हें बढ़ावा भी दिया।


मंदिरों और महंतों को वज़ीफ़े और ज़मीनें भी दिए। हुकूमत में उन्हें अच्छे ओहदे भी दिए।

711 में मुहम्मद बिन कासिम का भारत आना हुआ, मुहम्मद बिन कासिम से पहले भी कई बार अरब ने भारत के सिंध पर हमला करने के लिए अपनी सेना की टुकड़ियां भेजी थीं पर उनको कामयाबी नहीं मिली थी।  

मुहम्मद बिन कासिम अरब के वज़ीर ‘प्रधानमंत्री’ हिज्जाज का भतीजा था, मुहम्मद बिन कासिम के पिता का नाम कासिम था जिनका देहांत मुहम्मद के जन्म के समय ही हो गया था, हिज्जाज़ ने मुहम्मद की शिक्षा, दीक्षा अपनी निगरानी में करवाई थी।  

1857 से 2016 तक, मायने कि लगभग 159 सालो हो गए लेकिन मुस्लिम हिन्द का हुक्मरान नही बन सका। 

इन 159 साल में से तो 90 साल (1857-1947) तक तो हम अंग्रेजो के गुलाम रहे लेकिन 1947 से 2016 तक, मायने कि 59 साल हो गए लेकिन मुसलमानो की हालात बत्तर हो गयी।  

भारत में मुसलमानों के आने का सिलसिला इस्लाम के शुरुवाती समय से ही था, उस समय यहाँ अरब के कारोबारी, ताजिर व्यापार करने आते थे, एशिया के अनेक देशों में अरब के ताजिरों का आना जाना होता था।


वह लोग अरब से गरम मसाले, कपडा, गेहूं, घोड़े, ऊँट आदि का वयापार एशिया के देशों के साथ करते थे।