बारामूला में 29 पंडितों को अपना व्यवसाय चलाने के लिए वहाँ के मुस्लिमों ने मदद किया है। कैश काउंटर के पास कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ एक शेल्फ पर आराम करते हुए


एक सेल्समैन 27 वर्षीय इश्फाक अहमद मलिक, बारामुला के भीड़ भरे शहर के बाजार में एक कपड़ा दुकान में बिक्री रिकॉर्ड बनाने में व्यस्त है।

1989 –90 में आतंकियों के अत्याचारों से परेशान होकर बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ना पड़ा है।


हालांकि अब उनकी फिर से धीरे-धीरे वापसी हो रही है। इतना ही नहीं वे बड़ी आत्मीयता से मुस्लिमों के साथ रह रहे है। ये लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में खड़े होते हैं।

बारामुला: कश्मीर लौटे 29 कश्मीरी पंडित परिवारों के रोजगार में मदद कर रहे मुस्लिम

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बारामुला शहर के 27 वर्षीय सेल्समैन इश्फाक अहमद बताते है कि मालिक हृदयनाथ गंजू जो कि कश्मीरी पंडित हैं, वह शिवरात्रि मनाने के लिए इन दिनों जम्मू में हैं।


 मलिक कहते हैं, ‘मैं उनकी दुकान पर तकरीबन 11 वर्षों से काम कर रहा हूं। हर बार हिंदू त्योहार आते हैं और वह दुकान छोड़कर अपने जम्मू स्थित दूसरे घर चले जाते हैं।


वह तकरीबन 1 महीने तक वहां रहते हैं और होली मनाकर वापस लौटते हैं। वह हम पर यकीन करते हैं और हम इस दौरान उनके व्यापार का पूरा ख्याल रखते हैं।’

हालांकि, निवासियों, दुकानदारों और स्थानीय उद्योग संघों ने आश्वस्त किया कि बारामूला में वापस आने वाले पंडित सुरक्षित हैं।


बारामूला ट्रेडर्स एसोसिएशन के 65 वर्षीय अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ कहते हैं, “हम मुस्लिमों को 1989 में प्रवास के बारे में बहुत बुरा लगा … हम चाहते हैं कि हिंदू वापस आएं। हम उनका स्वागत करेंगे।”

गंजू का परिवार उन 29 कश्मीरी पंडितों में आता है, जो बारामुला में रहकर मुस्लिमों के सहयोग से अपनी दुकान चलाते हैं।


वीरवान के पास कुछ कॉलोनियां बनी हुई हैं, जहां पर कश्मीरी पंडित रहते हैं। बारामुला ट्रेडर्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट मोहम्मद अशरफ (65) कहते हैं, ‘हम एक दूसरे की खुशियों में शरीक होते हैं, फिर वह त्योहार हो, किसी का जन्मदिन हो या विवाह का आयोजन।’