18 हजार ग्राम पंचायतें अभी तक वंचित
वर्ष 1995 में पहली बार त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था और उसमें आरक्षण के प्रावधान लागू किए गए थे।

मगर तब से अब तक हुए पांच पंचायत चुनावों में प्रदेश की करीब 18 हजार ग्राम पंचायतें, करीब 100 क्षेत्र पंचायतें और लगभग आधा दर्जन जिला पंचायतों में क्रमश: ग्राम प्रधान, क्षेत्र व जिला पंचायत अध्यक्ष के पद आरक्षित होने से वंचित रह गए।

यूपी में इस बार होने जा रहे त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण को तय करने के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार ने 2015 के पंचायत चुनाव में तत्कालीन सपा सरकार के फैसले को पलट दिया है।

जातिगत आरक्षण से वंचित नहीं रहेगी कोई पंचायत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पंचायत जातिगत आरक्षण से वंचित नहीं रहने पाए। पंचायतीराज विभाग के सूत्रों के हवाले से  मिली जानकारी के अनुसार इस बार के चुनाव के लिए जो आरक्षण फार्मूला लागू किया जाएगा, उसमें अब कोई भी पंचायत जातिगत आरक्षण से वंचित नहीं रहेगी। 

इस बारे में मंगलवार को पंचायतीराज विभाग की ओर से लाये गये प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दी गई।

इस तरह तय होगा आरक्षण
प्रदेश सरकार ने निर्णय किया है कि इस बार के चुनाव के लिए आरक्षण तय करते समय सबसे पहले यह देखा जाए कि वर्ष 1995 से अब तक के पांच चुनावों में कौन सी पंचायतें अनुसूचित जाति (एससी) व अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित नहीं हो पाई हैं।

यूपी पंचायत चुनाव: इस तरह तय होगा आरक्षण

इन पंचायतों में इस बार प्राथमिकता के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। नए फैसले से अब वह पंचायतें जो पहले एससी के लिए आरक्षित होती रहीं और ओबीसी के आरक्षण से वंचित रह गईं, वहां ओबीसी का आरक्षण होगा और जो पंचायतें अब तक ओबीसी के लिए आरक्षित होती रही हैं वह अब एससी के लिए आरक्षित होंगी। इसके बाद जो पंचायतें बचेंगी, वह आबादी के घटते अनुपात में चक्रानुक्रम के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए होंगी।