जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं,
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं।  

अगर अनारकली हैं सबब बगावत का,
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं।  


नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे,
हवा को धुप, चरागों को शाम कह देंगे।  

किसी से हाथ भी छुप कर मिलाइए,
वरना इसे भी मौलवी साहब हराम कह देंगे।  

सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें।  

शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें।  

जवान आँखों के जुगनू चमक रहे होंगे,
अब अपने गाँव में अमरुद पक रहे होंगे।  

भुलादे मुझको मगर, मेरी उंगलियों के निशान,
तेरे बदन पे अभी तक चमक रहे होंगे।  

अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं,
पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं।  

आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो,
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो।  

राहत इन्दोरी – आपकी पसंदीदा शायरी एक जगह

गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम  क्या क्या हैं,
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं।  

फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं,
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं।  

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते  हैं,
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं।


ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी,
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं। 
   

सरहदों पर तनाव हे क्या,
ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या।  

शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं,
गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं।  

राहत इन्दोरी – उर्दू शायरी- आपकी पसंदीदा शायरी एक जगह

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं,
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता हैं।  

उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो,
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं।  

हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं,
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं।  

मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया,
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं।  

राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें,
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो।  

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए,
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए।  

दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया,
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए।