23 साल पहले राजस्थान के दौसा के समलेटी में रोडवेज बस में हुए बम विस्फोट मामले में हाईकोर्ट ने अब्दुल हमीद को फांसी और पप्पू को आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए शेष छह आरोपियों को बरी कर दिया है।  

अब जबकि ये लोग बरी होकर रिहा हो गए हैं, सबसे बड़ा सवाल है कि उनके जीवन के 23 साल कहां गए? कहां गए का जवाब सबको मालूम है- जेल में. मगर उन 23 सालों के बर्बाद हो जाने का जिम्मेवार कौन है? कौन है, जिसकी जवाबदेही तय होगी?


इन पांचों की भोगी सारी यातनाओं के लिए, उनके परिवार ने जो झेला उन सारी तकलीफ़ों के लिए कौन जवाब देगा, इन सवालों का कोई जवाब मालूम नहीं है।  

उनका मज़ीद कहना था वे एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे, लेकिन अपराध शाखा ने उन्हें मामले में आरोपी बना दिया। उन्हें दिल्ली और अहमदाबाद की जेलों में रखा गया था। 


पैरोल या जमानत पर भी रिहा नहीं किया गया था।  बेग आगरा का रहने वाला है, जबकि गनी जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले का बाशिंदा है।  अन्य लोग श्रीनगर के रहने वाले हैं।

समलेटी ब्लास्ट केस- बाइज़्ज़त बरी हुए 5 मुस्लिम आरोपी, इनके 23 साल कौन लौटाएगा

 द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार रोडवेज बम ब्लास्ट मामले में साजिश के आरोप में सलाखों के पीछे रहे इन लोगों का कहना था कि वे बरी तो कर दिए गए, लेकिन उनके 23 साल कौन लौटाएगा।  

बरी किए गए आरोपियों में जावेद खान, अब्दुल गनी, लतीफ अहमद, मिर्जा निसार हुसैन, मोहम्मद अली भट्ट और रईस बेग शामिल हैं।


आरोपियों खिलाफ मजबूत साक्ष्य नहीं होने के कारण उनको बरी किया गया है।  

जिस ब्लास्ट से जुड़ा है ये केस, वो 22 मई 1996 को हुआ था. जयपुर-आगरा हाई वे पर दौसा नाम की एक जगह है।


यहां समलेटी गांव में बीकानेर से आगरा जा रही एक बस के अंदर धमाका हुआ था  इसमें 14 लोगों की जान गई और 37 जख़्मी हुए थे ।