मिसाल पुलिस कांस्टेबल सविता अपनी सैलरी के पैसों से कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ा रही हैं

यहां बाहर से आकर मजदूरी कर गुजर बसर करने वाले गरीब लोगों के परिवार रहते हैं। गरीबी के साथ-साथ अशिक्षा की वजह से मां-बाप बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे थे। जबकि कुछ परिवार ऐसे थे, जो बच्चों के श्रम से ही घर खर्च चलाते थे।

सीमांत बनबसा के नगर पंचायत परिसर के खुले आसमान के नीचे बच्चों को पढ़ा रही सविता कोहली बनबसा थाने में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं।


सविता ने अपनी मेहनत और लगन से कूड़ा चुनने वाले इन बच्चों की तकदीर बदल दी है। अब इन बच्चों के हाथ में कूड़े की थैली की जगह कॉपी-किताबों ने ले ली है।  

सविता की यह मुहिम मिना बाजार में बसे झुग्गी झोपड़ी के बच्चों तक पहुंची, जो कारवां बढ़ता चला गया। अब 30 से ज्यादा बच्चे किताबी अक्षर ज्ञान से रूबरू हो रहे हैं। सविता कोहली की इस पहल की स्थानीय लोग भी प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं।

उत्तराखंड के चम्पावत जिले में उत्तराखंड मित्र पुलिस की महिला सिपाही सविता कोहली अपनी व्यस्त ड्यूटी से वक्त निकालकर या ड्यूटी के बाद शाम को अपने खर्च पर बच्चों को शिक्षा दे रही है।

इतना ही नहीं स्कूल तक नहीं पहुंचने वाले बच्चों को वो निःशुल्क पढ़ा रही हैं।

सविता ने इन परिवारों से बात कर उन्हें समझाया और बच्चों को उनकी क्लास में भेजने को कहा। कुछ दिन मशक्कत के बाद सविता उन्हें समझाने में कामयाब हुई।


इस तरह बनबसा नगर पंचायत परिसर का खुला मैदान एक पाठशाला में तब्दील हो गया। उसी दिन से ड्यूटी खत्म होने के बाद सविता शिक्षिका का भी दायित्व निभाती आ रही हैं।

सविता बताती हैं कि जब उनकी ड्यूटी बस स्टेंड के पास लगी थी, इस दौरान छह-सात साल की उम्र के दो बच्चों को उन्होंने कूड़ा बीनते देखा। उनसे पूछा, कि स्कूल क्यों नहीं जाते। बच्चों के चेहरे पर खामोशी देख वो समझ गईं और कहा कि कल से मैं तुम्हें पढ़ाऊंगी।


अगले दिन सविता खुद टाट-चटाई, कॉपी, किताब, पेंसिल एवं अन्य स्टेशनरी खरीदकर मीना बाजार झोपड़-पट्टी इलाके में पहुंच गई।