इससे पहले 2013 में भी जब लोकसभा में वंदे मातरम हो रहा था, उस वक्त भी शफीकुर्रहमान बर्क सदन से बाहर चले गए थे। उस समय भी उनकी जमकर आलोचना हुई थी। 

इसके बाद सदन में जमकर नारेबाजी होने लगी और कुछ सांसद वंदे मातरम के नारे लगाने लगे। बता दें कि ये पहला मामला नहीं है जब शफीकुर्रहमान बर्क इस तरह के विवादों में पड़े हैं। 

नवगठित लोकसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को शपथ ग्रहण करने के दौरान सदन में उस वक्त जोरदार हंगामा हुआ

जब उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट से निर्वाचित सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक टिप्पणी की।

शपथ लेने के बाद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा, 'भारत का संविधान जिंदाबाद और जहां तक वंदे मातरम का सवाल है, ये इस्लाम के खिलाफ, हम उसको नहीं मान सकते हैं।'

शफीकुर्रहमान  ने वंदे मातरम को इस्लाम के खिलाफ बताया कहा ‘‘भारत का संविधान जिंदाबाद’’

गौरतलब है कि शफीकुर्रहमान बर्क 2004 से 2009 तक उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और 2009 से 2014 तक संभल से सांसद निर्वाचित हुए थे।

वंदे मातरम् का हमेशा विरोध करने वाले सपा सांसद बर्क उत्‍तर प्रदेश से संसद में पहुंचने वालों में सबसे ज्‍यादा उम्रदराज सांसद हैं। इस समय उनकी उम्र 86 साल है। 


शफीकुर्रहमान बर्क तर्क ये था वंदे मातरम् का मतलब भारत माता की पूजा या वंदना करना है और इस्लाम में खुदा के अलावा किसी की पूजा करना जायज नहीं है।