ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान का जन्म आजमगढ़ जिले के बीबीपुर गांव में हुआ था। इनके पिता खान बहादुर मुहम्मद फारूख पुलिस में आला अधिकारी थे जबकि इनकी मां जमीरून्निसां घरेलू महिला थी। 

इनकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा स्थानीय मरदसे में हुई और आगे की पढ़ाई हरश्चिंद्र स्कूल वाराणसी तथा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हुई।


यह न सिर्फ अच्छे खिलाड़ी थे बल्कि प्रखर वक्ता भी थे। अपनी पढ़ाई पूरी कर वह 23 साल की उम्र में वह सैन्य अकादमी चले गए।

बंटवारे के बाद सीमा पर पाकिस्तानी दखलअंदाजी जारी थी। उसी दौरान उन्हें 77 पैरा ब्रिगेडियर कमाण्डर बना कर नौशेरवा, पुंछ, राजौरी, मीरपुर, अखनूर, बैरीपत्तन आदि क्षेत्रों की हिफाजत के लिए भेजा गया जहां स्थित काफी गंभीर बनी हुई थी।

पाक घुसपैठियों ने 25 दिसंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के झंगड़ नामक इलाके को कब्जे में ले लिया था। लेकिन ब्रिगेडियर उस्मान की बहादुरी की वजह से नौशेरा-झंगड़ फिर भारत के कब्जे में आ गए थे।  
भारत के शहीद ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान का जन्म 1912 में आज ही यूपी के आजमगढ़ में हुआ था।

द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्हें अपनी फौज के साथ लड़ने का मौका मिला और अपनी हिम्मत और बहादुरी के जौहर दिखाए।


देश के विभाजन के बाद वह बल्लौच रेजीमेंट से निकल कर गोरखा रेजीमेंट में दाखिल हो गए।

पाकिस्तानी घुसपैठियों ने 25 दिसंबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के झंगड़ नामक इलाके को कब्जे में ले लिया था। लेकिन उनकी बहादुरी की वजह से मार्च 1948 को नौशेरा और झंगड़ फिर भारत के कब्जे में आ गए।

नौशेरा के शेर शहीद ब्रिगेडियर उस्मान पर पाक सरकार ने रखा था 'पचास हजार' का इनाम

अपनी नेतृत्व क्षमता की वजह से ही उन्हें नौशेरा का शेर कहा जाता है। इस घटना के बाद पाकिस्तानी सरकार ने उन पर पचास हजार का इनाम रखा था।


3 जुलाई 1948 को झंगड़ में ही मोर्चे पर देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए।

पाकिस्तान सरकार ने उन्हें अपने मुल्क में आने पर उन्हें सेना में ऊंचा पद देने का लालच दिया। यहां तक कि मोहम्मद अली जिन्ना और लियाकत अली खा ने भी प्रयास किया लेकिन देश प्रेम उनके अंदर कूट-कूट कर भरा था।


उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक जिंदगी है हिन्दुस्तान की हिफाजत करता रहूंगा। इस पर तिलमिला कर पाकिस्तान सरकार ने इन पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा।

इन्हें इस बीच कई बाधाओं से गुजरना पड़ा लेकिन तीन महीने के अभियान में वह कामयाब हुए और नौशेरा घाटी को आजाद कराया।


ब्रिगेडियर उस्मान को शहादत के बाद दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.मोख्तार अहमद अंसारी के बगल में पूरे सैनिक सम्मान के साथ दफन किया गया।