इस गठबंधन में मुसलमानों को कोई जगह नहीं मिली। जबकि, बिना गठबंधन के दो सीट कांग्रेस और दो सीट 1.5 फीसद वोट बेस वाले अन्य दल के लिए छोड़ दी गई है।


जबकि, इस हिसाब से मुस्लिम नेतृत्व वाले दल के लिए 16 सीटें बनती हैं। पर उनके लिए दो सीट भी नहीं छोड़ी गईं।


अगर ऐसा नहीं है तो सपा-बसपा मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को लेकर अपना मत स्पष्ट करें और अपने इस महागठबंधन में राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल व अन्य मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को शामिल कर अपना मत स्पष्ट करें।

मौलाना के मुताबिक सात फीसद यादव समाज के नेता अखिलेश व 11 फीसद जाटव समाज की नेता मायावती आपस में 38-38 सीटों का बंटवारा कर रहीं हैं, लेकिन 22 फीसद मुस्लिम नेताओं को शून्य हिस्सेदारी देकर मुफ्त में सिर्फ भाजपा का डर दिखाकर समाज का वोट लेना चाहती हैं।

सपा-बसपा गठबंधन मुसलमानों के लिए ठगबंधन : मौलाना आमिर रशादी

साभार- ‘दैनिक जागरण ’

मंगलवार को हुसैनगंज स्थित संगठन कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने सपा-बसपा के गठबंधन को मुस्लिम राजनैतिक नेतृत्व को समाप्त कर उनको गुलाम बनाने की साजिश बताया। कहा कि अगर सपा-बसपा को मुसलमानों का वोट चाहिए तो उन्हें हिस्सेदारी दें।


उन्होंने मज़ीद कहा कि  मुस्लिम समाज ने परम्परागत तरीके से सपा-बसपा को वोट दिया है और 70 सालों से सेकुलरिज़्म लगातार सेकुलरिस्म की बुनियाद को मजबूत किया है।  

परंतु इस गठबंधन से मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों को दूर रखना न केवल सपा-बसपा का मुस्लिम नेतृत्व वाले दलों के प्रति राजनैतिक दुर्भावना है बल्कि समाजिक न्याय के मूल्यों के भी विरुद्ध है।


राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने लखनऊ में एक प्रेस वार्ता कर गठबंधन को मुसलमानों के लिए ‘ठगबंधन‘ करार दिया।


राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के अध्यक्ष ने सपा-बसपा के गठबंधन के खिलाफ दी कड़ी प्रतिक्रिया। कहा, मुस्लिम राजनैतिक नेतृत्व को समाप्त कर गुलाम बनाने की साजिश, वोट चाहिए तो हिस्सेदारी दें ।