बंदूक निश्चित रूप से हाइलाइट है क्योंकि यह न केवल टीपू सुल्तान के शस्त्रागार का प्रतीक है, बल्कि युद्ध में इस्तेमाल भी की जा चुकी है।  एक संभवना ये भी है कि ये बंदूक टीपू सुल्तान ने अंग्रेज़ों के खिलाफ़ एंग्लो-मैसूर लड़ाई में इस्तेमाल की थी। 

क्या क्या मिला -


1.टीपू सुल्तान की बाघ की धारी वाली बंदूक, जिसके बारे में कहा जाता है कि सेरिंगपटम में अपनी आखिरी लड़ाई के दौरान उन्होंने इसका उपयोग किया था।  

2.उनके पिता हैदर अली खान की सोने से बनी तलवार।  

3.एक सोने की सुपारी रखने वाली सन्दूकषी, जिसमे 3 सुपारी अभी भी हैं।  

ये चीज़ें पीढ़ी दर पीढ़ी इसी परिवार में रहीं और अब ये नीलम होने वाली हैं इस परिवार लिए अच्छी-ख़ासी रकम ला सकती हैं।

220 साल बाद ब्रिटेन के घर के तहखाने में मिली टीपू सुल्तान की तलवार और बन्दूक

खोज की "विशेष" प्रकृति होने के कारण, किसी भी कीमत के अनुमान के बिना इसे नीलामी के लिए रखा जाएगा।   

एंटनी क्रिब लिमिटेड, जो पुराने हथियारों को बेचने मामले में ख़ासी विशेषज्ञता रखता है, के नीलामीकर्ता एंथोनी क्रिब ने कहा कि ये एक बहुत ही रोमांचक खोज है, जो बर्कशायर के एक साधारण से घर में 220 साल के बाद मिली है।  

एक ब्रिटिश परिवार को हाल ही में अपने घर के तहख़ाने में टीपू सुल्तान से जुड़ी कुछ अमूल्य चीज़ें मिली हैं। 
उनके पूर्वज, मेजर थॉमस हार्ट, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में एक सेना अधिकारी थे, जो 1798-99 में लड़े गए चौथे एंग्लो-मैसूर युद्ध के बाद कुछ कलाकृतियां अपने घर ले आए थे। 

 
जो मूल्यवान चीज़ें परिवार को तहख़ाने में मिली, वो वास्तव में टीपू सुल्तान के शस्त्रागार से लायी गयी थी।