रजिस्ट्रेशन नम्बर के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता कैसे करें


वाहन का रजिस्ट्रेशन राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर होता है. आरटीओ दोनों के बीच डाटा का आदान प्रदान करता है. VIN अर्थात वाहन पहचान संख्या के आधार पर भारत में सभी निजी और व्यापारिक वाहनों के नम्बर प्लेट को इस तरह से विभाजित किया गया है कि इसके नम्बर से ही गाड़ी के मालिक का भी पता चल जायेगा. रजिस्ट्रेशन नम्बर का अगर शुरूआती नम्बर भी याद हो तो किसी भी जरुरत जैसे गाड़ी चोरी हो जाए या गाड़ी से कोई दुर्घटना हो जाए, तो उस नम्बर के द्वारा गाड़ी के मालिक को खोजा जा सकता है। 

भारत सरकार के द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से
parivahan.gov.inये वेवसाइट बनाई गयी है।  


इसके माध्यम से सारी जानकारी आपको ऑनलाइन प्राप्त हो सकती है. आप गाड़ी ढूँढने के लिए गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर इस साईट पर डाल दें और एंटर करते ही आपके पास इस वाहन से सम्बंधित जानकारी आपके सामने होगी


 इस साईट के माध्यम से जानकारी जुटाने के लिए आपका मोबाइल नंबर RTO कार्यालय या गाड़ी लेने के समय रजिस्टर्ड होना चाहिए; क्योंकि parivahan.gov.in की तरफ से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जायेगा।  

भारत में नई नंबर प्रणाली जो वर्तमान में सभी राज्यों और शहरों में चल रही है, 1990 के दशक के शुरू में लागू हुई थी. वर्तमान प्रारूप में नम्बर प्लेट में लिखे अक्षरों को चार भागों में बांटा गया है।


इसको एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं:

मान लो किसी गाड़ी का नंबर: MH 04   DV 0163 
 
उस राज्य को इंगित करता है जहां गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हुआ है. यहां MH का अर्थ महाराष्ट्र है।  
उस जिले के रजिस्ट्रेशन ऑफिस को इंगित करता है जहां गाड़ी का रजिस्ट्रेशन हुआ है।  
यहां 04 का अर्थ ठाणे जिला है।  
DV उस रजिस्टर का शीर्षक है जिसमें इस नंबर को अंकित किया गया है।


​0162 का अर्थ यह है कि DV शीर्षक वाले रजिस्टर में इस गाड़ी की एंट्री 162वें नंबर पर की गई है। 

जानिये नम्बर प्लेट के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता ऑनलाइन कैसे करें

इस लेख में आप यह जानेंगे कि कैसे एक वाहन में लिखे गए नंबर की मदद से आप उस वाहन के मालिक और वह वाहन किस राज्य का है इसका पता लगायें। 

अगर आप Second hand car, bike या फिर कोई अन्य  वाहन खरीदना चाहते है तो आप इस तरीके से वाहन मालिक  का पता, गाड़ी की रजिस्ट्रेशन डेट और भी बहुत कुछ जान सकते है।  

पहले के समय में जब टेक्नोलॉजी बहुत कम विकसित थी तब RTO के माध्यम से गाड़ी के मालिक का पता चलता था और उसमे भी हमें बहुत से पापड़ बेलने पड़ते थे।  
आज के दौर में हम सिर्फ दो मिनट में ही vehicle number plate पर दिए गाड़ी के नंबर से गाड़ी के मालिक का पता कर सकते है।