तरन्नुम बानो बताती हैं, कि हमारे इस इलाके में लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता है लेकिन हमारे माता-पिता ने हमें शिक्षा दी. हम जब पढने जाते तो अपने उम्र की लड़कियों को घर में काम करते देखकर हमें अच्छा नहीं लगता था इसलिए हमने सोचा कि हम अपनी शिक्षा के साथ इन्हें भी शिक्षा दें, तबसे हम लोगों ने इन्हें पढ़ाना शुरू किया.

वहीं रुबीना का कहना है कि आज हम इस काम को भले ही अच्छी तरह से कर रहे है पर शुरू में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ा था पर आज हम लोग बेहद खुश है, की हमारी मेहनत रंग लायी है. इन तीन लड़कियों की लगन और हिम्मत का ही नतीजा है कि आज गांव के सभी लोग इन्हें आदर्श मानते हैं.

बता दें, कि सजोई गांव में बुनकर परिवार की तीन मुस्लिम लड़कियों ने 2010 में एक बंद पड़े मदरसे में गांव के गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया.


बड़ी बहन तरनुम बताती हैं कि शुरू में काफी विरोध हुआ. उन्होंने कहा, 'धीरे-धीरे क्लास फाइव तक के बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, मैथ के साथ उर्दू भी पढ़ाना शुरू किया गया पर गांव की लड़कियों को उनके माता-पिता ने पढ़ने की इजाजत नहीं दी.

काशी की शान हे ये तीन बहने, मुस्लिम औरतों में जगा रही है तालीम का अलख

तीनों बहनों ने 20 हजार की आबादी वाले गांवों में साक्षरता की ऐसी अलख जगायी कि 90 प्रतिशत अनपढ़ पांच सालों में साक्षर हो गए है.


इनके जज्बे की कहानी इतनी बुलंद है कि इन तीनों बहनों को फिल्म स्टार आमिर खान और बिजनेस वूमेन नीता अंबानी ने भी सलाम किया है

बनारस से लगभग बीस किलोमीटर दूर सोजईं नाम का एक गाँव है. गाँव में बिजली-पानी की हालत खस्ता है.


गाँव में मुस्लिम बस्ती है, यहाँ अधिकतर बुनकर रहते हैं. बुनकारी वैसे भी ऐसा पेशा माना जाता है जिसमें पैसे कम होते हैं, लेकिन ख़ास बात यह है कि कम पैसों और संसाधनों के साथ इस बस्ती के हरेक घर का बच्चा आज शिक्षा पा रहा है.


और यह मुमकिन हुआ है गाँव की तीन लड़कियों तबस्सुम, तरन्नुम और रुबीना की बदौलत

यह भी पढ़ें

मुस्लिम तबके की बच्चियों को मुहिम में शामिल करने में दिक्कत होने लगी तो तबस्सुम, तरन्नुम और रुबीना ने औरतों-लड़कियों को सिलाई-कढ़ाई बुनाई के कार्यक्रम में जोड़ना शुरू किया. लेकिन इस दौरान लड़कियों के एक नारा बनाया, “सिलाई-कढ़ाई बहाना है/ असली मकसद पढ़ाना है.”

रुबीना हँसते हुए बताती हैं, ‘बाद में लोगों को पता चला कि उनकी बच्चियां पढ़ रही हैं तो वे कोई विरोध नहीं दर्ज कर सके.’