देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति बनाने वाले इन सैकड़ों कर्मचारियों ने अपने औजार साइट पर ही छोड़ दिए थे, जिसके बाद उन्होंने 182 मीटर (600 फुट) ऊंची प्रतिमा के इर्द-गिर्द ह्यूमन चेन बनाई थी।

सरदार की यह मूर्ति इससे पहले तक विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, चीन के स्प्रिंग टेंपल ऑफ बुद्ध से 29 मीटर ऊंची है। चीनी प्रतिमा की ऊंचाई 153 मीटर है।


इतना ही नहीं, यह न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मीटर) से भी यह लगभग दोगुना बड़ी है।


विंध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नर्मदा नदी के टापू पर बनी इस मूर्ति को बनाने में तकरीबन 2389 करोड़ रुपए का खर्च आया था।

बता दें कि पीएम मोदी ने अपने गृह राज्य गुजरात में 31 अक्टूबर 2018 को इसका अनावरण किया था।


ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट की मानें तो प्रतिमा के उद्घाटन के लगभग दो महीने बाद से उसकी देख-रेख में जुटे कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दी गई। ऐसे में वे हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए।  

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की सेवा में जुटे कर्मचारियों को तकरीबन चार महीने से वेतन नहीं मिला है।


इसी के विरोध में हड़ताल पर चले गए हैं। ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिहाड़ी न दिए जाने के लिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

स्टैच्‍यू ऑफ यूनिटी के कर्मचारियों को चार महीने से नहीं मिला वेतन, हड़ताल पर गए